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राजस्थान की 11,000 से अधिक ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त, चुनाव में देरी के कारण प्रशासक नियुक्त

 राजस्थान की 11,310 से अधिक ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, जिससे इन क्षेत्रों में अफसर राज (अधिकारियों का शासन) शुरू हो गया है। पंचायत चुनाव में हो रही देरी के कारण, इन सभी संस्थाओं में अस्थायी रूप से प्रशासक नियुक्त किए जा रहे हैं। न केवल ग्राम पंचायतें, बल्कि 352 पंचायत समितियों में से 222 समितियों का कार्यकाल भी जल्द ही खत्म होने वाला है, और 21 जिला परिषदों में भी यही प्रक्रिया चल रही है। सरकार ने अभी तक पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव की तारीखें घोषित नहीं की हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक शून्यता की स्थिति बन गई है।


स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति ने जनता के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। अब रोजमर्रा की समस्याओं को हल करने के लिए वार्ड पार्षद या सरपंच तक सीधी पहुँच नहीं है, और लोगों को अपनी शिकायतें सरकारी दफ्तरों तक ले जानी पड़ रही हैं, जहाँ अफसरों से मिलना कठिन है। इससे ग्रामीण या कॉलोनी की समस्याएँ फील्ड प्रतिनिधि के बजाय सरकारी दफ्तरों तक सीमित हो गई हैं, जो जमीनी स्तर पर शासन की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। यह स्थिति तब बनी है जब राजस्थान हाईकोर्ट ने कई बार पंचायतीराज संस्थाओं और निकायों में समय पर चुनाव कराने के आदेश दिए हैं।

चुनाव में देरी के बावजूद, एक महत्वपूर्ण कानूनी बदलाव पर विचार चल रहा है। राजस्थान स्थानीय निकाय चुनावों में दो-बच्चे के नियम को खत्म करने पर विचार कर रहा है। वर्तमान में, 27 नवंबर 1995 के बाद तीसरा बच्चा होने वाले व्यक्तियों को पंचायत या स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने से रोक दिया जाता है। इस नियम को हटाने से स्थानीय चुनाव लड़ने के इच्छुक कई उम्मीदवारों को राहत मिल सकती है। इस बीच, राज्य निर्वाचन आयोग चुनावी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहा है, जिसमें चुनाव खर्च सीमा को बढ़ाने पर भी विचार शामिल है।

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