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पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में अगला कदम

 भारत में पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायतों के प्रदर्शन को मापने और सशक्त बनाने के लिए पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 विकसित किया है। यह सूचकांक पंचायतों के प्रयासों को मापता है और सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के स्थानीयकरण की दिशा में उनकी प्रगति का आकलन करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (24 अप्रैल) पर PAI को स्थानीय शासन को सशक्त बनाने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम बताया था। PAI एक बहुआयामी सूचकांक है, जो पंचायतों की प्रगति को मापता है, विकास में अंतर की पहचान करता है, और जमीनी स्तर पर पंचायती राज संस्थाओं की मजबूत तस्वीर को सामने लाता है।


PAI 1.0 के 2022-23 के डेटा के अनुसार, 2.56 लाख ग्राम पंचायतों में से 2.16 लाख ने मान्य डेटा प्रस्तुत किया था। इसमें से कोई भी पंचायत 'अचीवर' के रूप में योग्य नहीं पाई गई थी, जबकि 0.3% को 'फ्रंट रनर', 35.8% को 'परफॉर्मर', 61.2% को 'एस्पिरेंट्स' और 2.7% को 'बिगिनर' के रूप में वर्गीकृत किया गया था। यह परिणाम पंचायतों के विकास और सशक्तीकरण में आने वाली बाधाओं को दर्शाता है। विशेष रूप से, 15वें वित्त आयोग ने नोट किया था कि केवल 8 राज्यों ने अपने छठे राज्य वित्त आयोग (SFC) का गठन किया है, जिससे पंचायतों के लिए वित्त पोषण और विकास में रुकावट आ रही है।

उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने हाल ही में कहा है कि PAI ग्राम पंचायतों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा और उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक कार्यों की जानकारी मिलेगी। उन्होंने राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के तहत PAI पर एक कार्यशाला का उद्घाटन भी किया। मंत्री ने मॉडल ग्राम पंचायत बनाकर शहर से गांव की ओर लोगों का पलायन कराने की बात कही, क्योंकि वर्ष 2047 के विजन डॉक्युमेंट में ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका है। PAI की मदद से पंचायतों को अपना सूचकांक तैयार करने का अवसर मिल रहा है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

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